लावरोव: रूस भारत की स्थायी UNSC सीट की दावेदारी का समर्थन करता है
विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि रूस भारत और ब्राज़ील की स्थायी सीट का समर्थन करता है, और पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों का विरोध करता है। यह समर्थन का बयान है। इससे परिषद की सदस्यता अपने आप नहीं बदलती।
रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने शनिवार को कहा कि रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन करता है। India Today ने यह बात उनके महासभा संबोधन से छापी। उन्होंने ब्राज़ील का समर्थन किया, और पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों का विरोध किया। यह समर्थन का बयान है। India Today चार्टर संशोधन का नियम लिखता है। एक स्थायी सदस्य का बयान सीट नहीं जोड़ता।
India Today ने उनका उद्धरण दिया: "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सुधार पश्चिमी देशों को अतिरिक्त सीटें देकर नहीं हो सकता, खासकर जर्मनी और जापान को, जो अब सैन्यवाद और प्रतिशोध के रास्ते पर हैं।" उन्होंने कहा: "हम एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पक्ष में हैं। हम ब्राज़ील और भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन करते हैं।" उन्होंने कहा कि अफ़्रीका के हितों का ध्यान रखना होगा। जर्मनी और जापान के बारे में ये शब्द उनके हैं। उन्होंने एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के लिए बड़ा स्थान भी माँगा।
TASS ने उस भाषण के बाद की प्रेस कॉन्फ़्रेंस छापी, 81वें सत्र की आम बहस में, 26 सितंबर को। उन्होंने कहा कि पश्चिम पहले से ज़्यादा प्रतिनिधित्व रखता है और मास्को नई "पश्चिमी सीटें" नहीं होने दे सकता। TASS का उद्धरण: "हम कोई नई पश्चिमी सीट नहीं दे सकते और न होने दे सकते हैं, क्योंकि पश्चिम पहले से ही आवश्यकता से अधिक प्रतिनिधित्व रखता है।" उन्होंने जर्मनी और जापान के लिए अतिरिक्त सीटें फिर बाहर रखीं। TASS के अनुसार उन्होंने ब्राज़ील और भारत का समर्थन दोहराया, और अफ़्रीका के हित इज़ुलविनी सहमति तथा सर्ते घोषणा से जोड़े। TASS इन दस्तावेज़ों के नाम लेता है, पाठ नहीं छापता।
India Today के अनुसार उसी बहस में और सरकारों ने भी भारत की दावेदारी पर बात की। मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने कहा कि मॉरीशस परिषद सुधार पर G4 और L69 का समर्थन करता है, और भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन करता है, "उसकी वैश्विक मामलों में रचनात्मक भूमिका के अनुरूप।" पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने अधिक प्रतिनिधि परिषद की बात कही, जिसमें अफ़्रीका, ब्राज़ील और भारत का स्थायी प्रतिनिधित्व हो। ये समर्थन के और बयान हैं। India Today ने इन्हें मतदान नहीं बताया।
इस बात पर दूसरा रुख भी दर्ज है कि स्थायी सीट किसे मिले। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि परिषद आज की हकीकत दिखाने के लिए बदले, और स्थायी तथा अस्थायी दोनों सीटों में विस्तार हो। मार्शल द्वीप समूह की राष्ट्रपति हिल्डा हाइने ने कहा: "मार्शल द्वीप समूह जापान और उसके G4 साझेदारों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिलाने के अपने लंबे समर्थन की पुष्टि करता है।" लावरोव की आपत्ति और जापान वाले विस्तार का आह्वान, दोनों वक्ताओं के शब्दों में यहाँ हैं। रिपोर्टें G4 और L69 के सदस्य नहीं गिनतीं।
सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो ने कहा कि परिषद अब भी 1945 की दुनिया दिखाती है, और 1.6 अरब से अधिक आबादी वाले अफ़्रीका के पास स्थायी सीट नहीं है। घाना के राष्ट्रपति जॉन द्रमानी महामा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता के लिए सुधार ज़रूरी है। किसी रिपोर्ट में अफ़्रीका की स्थायी सीट तय नहीं हुई।
India Today ने परिषद का मौजूदा रूप लिखा। पाँच स्थायी सदस्य, चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका, वीटो रखते हैं। दस अस्थायी सदस्य दो-दो साल के लिए आते हैं। चार्टर के संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, और सदस्य देशों के दो-तिहाई का अनुमोदन, जिसमें सभी पाँच स्थायी सदस्य शामिल हों। भारत के लिए लावरोव का समर्थन इन्हीं पाँच में से एक का बताया गया रुख है।
आगे क्या
स्थायी सीट किसके पास है, यह बदलने के लिए India Today वाला संशोधन-परीक्षण पूरा होना है: महासभा में दो-तिहाई मत, फिर सदस्य देशों के दो-तिहाई का अनुमोदन, हर स्थायी सदस्य सहित। इन रिपोर्टों में ऐसे मत की तारीख नहीं है। इनमें 81वें सत्र की आम बहस के भाषण हैं।
मुख्य बातें
- शनिवार को महासभा में लावरोव ने कहा कि रूस ब्राज़ील और भारत की स्थायी सीट की दावेदारी का समर्थन करता है, India Today के अनुसार।
- उन्होंने कहा कि सुधार में एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए, और पश्चिमी देशों, खासकर जर्मनी और जापान, की अतिरिक्त सीटें नहीं जुड़नी चाहिए।
- उसी दिन की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में, TASS के अनुसार, उन्होंने दोहराया कि मास्को नई पश्चिमी सीटें नहीं होने देगा, और अफ़्रीका के हितों को इज़ुलविनी सहमति तथा सर्ते घोषणा से जोड़ा।
- उसी आम बहस में मॉरीशस और पुर्तगाल ने भी भारत की स्थायी सीट या स्थायी प्रतिनिधित्व का समर्थन किया। मार्शल द्वीप समूह ने जापान और उसके G4 साझेदारों का समर्थन किया।
- India Today ने चार्टर का नियम लिखा: संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और सदस्य देशों के दो-तिहाई का अनुमोदन चाहिए, जिसमें सभी पाँच स्थायी सदस्य शामिल हों।
दोनों तरफ़ क्या कहा
रूस
लावरोव ने कहा कि रूस भारत और ब्राज़ील की स्थायी सीट का समर्थन करता है, एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका को बड़ा स्थान चाहता है, और पश्चिमी देशों की अतिरिक्त स्थायी सीटों का विरोध करता है। उन्होंने जर्मनी और जापान का नाम लिया।
जापान और मार्शल द्वीप समूह
प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की बात कही। राष्ट्रपति हिल्डा हाइने ने कहा कि मार्शल द्वीप समूह जापान और उसके G4 साझेदारों की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
पुष्टि नहीं हुई
- यह कि भारत को स्थायी सीट मिल गई है, या मिल जाएगी। रिपोर्टों में समर्थन के बयान और संशोधन का नियम है।
- इन दो विवरणों में भारत सरकार का कोई जवाब।
- इन रिपोर्टों में G4 या L69 के सदस्यों की सूची। वक्ताओं ने ये नाम लिए। लेख सूचियाँ नहीं जोड़ते।




