सुप्रीम कोर्ट की पीठ, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन, ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि जहाँ ई-चालान बकाया हो, वहाँ ऑनलाइन वाहन सेवाओं का एक सेट बंद हो। आदेश 28 सितंबर 2026 का है और 1 अक्टूबर को सार्वजनिक हुआ। न्यूट्रल पॉलिटिक्स ने द हिंदू, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और आईएएनएस की जाँच की। LiveLaw और Moneycontrol वे आउटलेट हैं जिनका नाम आदेश के कवर-उद्धरण के लिए है। यह नोट उनसे कोई अतिरिक्त शब्द नहीं जोड़ता, उन निर्देशों से आगे जो चार रिपोर्टें पहले ही लिखती हैं। खातों की जाँच 2 अक्टूबर 2026 (IST) को हुई। यह नोट उसी सुबह 11:30 बजे IST पर प्रकाशित हुआ।
निर्देश राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और उनके प्राधिकरणों को हैं। जिस वाहन पर ई-चालान बकाया है, उसकी ऑनलाइन सेवाएँ रोकनी हैं। यह रोक, जैसा ये रिपोर्टें लिखती हैं, रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र के नवीनीकरण, डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र, और मालिक के पते के अपडेट पर है। सभी बकाया ट्रैफ़िक जुर्माने के चुकने तक फ़िटनेस प्रमाणपत्र नहीं देना है। वाहन को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करना है। वह ब्लैकलिस्ट बिक्री या ट्रांसफ़र रोकता है।
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र उसी रोक में है। आदेश, जैसा रिपोर्ट हुआ, कहता है कि बकाया जुर्माना चुकने तक किसी केंद्र को पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। कई उल्लंघनों पर लाइसेंस नवीनीकरण रोकना है, और पहले से लागू लाइसेंस को निलंबित करने के कदम उठाने हैं। कितने उल्लंघन 'कई' गिने जाएँगे, जाँची गई रिपोर्टों में नहीं लिखा।
सड़क पर आदेश रैंडम जाँच का प्रावधान करता है। अगर ई-चालान नहीं चुकाया गया, तो वाहन को ज़ब्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। यह निर्देश वैसे है जैसा द हिंदू, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और आईएएनएस लिखते हैं।
अदालत को बताया गया कि करीब ₹49,194 करोड़ बकाया है और करीब ₹26,175 करोड़ वसूला जा चुका है। ये वे आँकड़े हैं जो अदालत को दिए गए। यह नोट उनकी नई गिनती नहीं है। द हिंदू की स्टोरी, आरत्रिका भौमिक की, 1 अक्टूबर रात 7:54 बजे IST की है। आईएएनएस उसी शाम 6:04 बजे IST का है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की स्टोरी, अमित आनंद चौधरी की, 2 अक्टूबर सुबह 3:32 बजे IST की है। हिंदुस्तान टाइम्स की स्टोरी, उत्कर्ष आनंद की, 2 अक्टूबर सुबह 7:07 बजे IST की है।
लिखित आदेश ई-चालान बकाया को बिजली बिल से नहीं जोड़ता। आईएएनएस लिखता है कि उन बकाया को बिजली बिल से जोड़ने का विचार अदालत में मौखिक टिप्पणी था, और वह लिखित आदेश में नहीं है। बिजली बिल इस आदेश की शर्त नहीं है। ऊपर लिखे निर्देश बकाया चालान को बिजली बिल पर रोक नहीं बनाते।
आगे क्या
जो अभी ज्ञात नहीं, वह यह है कि हर राज्य फ़्रीज़ कब शुरू करता है, पीयूसी केंद्र कैसे जाँचेंगे कि जुर्माना बकाया है या नहीं, कितने उल्लंघन 'कई' गिने जाएँगे, और 25 नवंबर की सुनवाई में क्या दर्ज होता है। वह तारीख वैसे है जैसा आईएएनएस लिखता है। सुनवाई क्या दर्ज करती है, यह अभी तथ्य नहीं है।
मुख्य बातें
- न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन ने आदेश 28 सितंबर 2026 को दिया। वह 1 अक्टूबर को सार्वजनिक हुआ।
- जब तक ई-चालान बकाया है, ऑनलाइन वाहन सेवाएँ रोकनी हैं। परिवहन पर ब्लैकलिस्ट बिक्री या ट्रांसफ़र रोकता है।
- बकाया जुर्माना चुकने तक प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं। कई उल्लंघनों पर लाइसेंस नवीनीकरण रोकना है।
- रैंडम जाँच में जो ई-चालान नहीं चुकाया गया, उससे वाहन ज़ब्त हो सकता है।
- अदालत को बताया गया कि करीब ₹49,194 करोड़ बकाया है और करीब ₹26,175 करोड़ वसूला जा चुका है।
- बिजली बिल से जोड़ लिखित आदेश में नहीं है। आईएएनएस लिखता है कि वह विचार अदालत में मौखिक टिप्पणी था।
दोनों तरफ़ क्या कहा
लिखित आदेश में
राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और उनके प्राधिकरण बकाया ई-चालान वाले वाहनों की ऑनलाइन सेवाएँ रोकेंगे: रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं, डुप्लिकेट प्रमाणपत्र नहीं, मालिक के पते का अपडेट नहीं, और जुर्माना चुकने तक फ़िटनेस प्रमाणपत्र नहीं। वाहन परिवहन पर ब्लैकलिस्ट होगा। जुर्माना चुकने तक कोई केंद्र पीयूसी प्रमाणपत्र जारी न करे। कई उल्लंघनों पर लाइसेंस नवीनीकरण रुकेगा और पहले से चल रहे लाइसेंस को निलंबित करने के कदम उठेंगे। रैंडम जाँच में न चुकाया गया ई-चालान ज़ब्ती तक जा सकता है।
लिखित आदेश में नहीं
आईएएनएस लिखता है कि ई-चालान बकाया को बिजली बिल से जोड़ना अदालत में मौखिक टिप्पणी था और लिखित आदेश में नहीं है। बिजली बिल इन निर्देशों की शर्त नहीं है।
पुष्टि नहीं हुई
- हर राज्य फ़्रीज़ कब शुरू करता है।
- कितने उल्लंघन 'कई' गिने जाएँगे, और पीयूसी केंद्र कैसे जाँचेगा कि जुर्माना बकाया है या नहीं।
- 25 नवंबर की सुनवाई में क्या दर्ज होता है। वह तारीख वैसे है जैसा आईएएनएस लिखता है।
स्रोत
- The Hindu (Aaratrika Bhaumik) https://www.thehindu.com/news/national/supreme-court-orders-curbs-on-licence-renewal-vehicle-registration-for-motorists-with-unpaid-traffic-fines/article71532969.ece · 1 अक्टूबर 2026, शाम 7:54 IST
- Hindustan Times (Utkarsh Anand) https://www.hindustantimes.com/india-news/supreme-court-order-pending-traffic-fines-challans-licence-puc-pollution-certificates-101790837511097.html · 2 अक्टूबर 2026, सुबह 7:07 IST
- The Times of India (Amit Anand Choudhary) https://timesofindia.indiatimes.com/india/supreme-court-says-seize-vehicle-stop-rc-puc-renewal-if-e-challans-not-paid/articleshow/134627354.cms · 2 अक्टूबर 2026, रात 3:32 IST
- IANS https://ianslive.in/scs-written-order-on-e-challans-does-not-include-linking-traffic-fines-to-electricity-bills--20261001175735 · 1 अक्टूबर 2026, शाम 6:04 IST
- LiveLaw https://www.livelaw.in/top-stories/impound-vehicles-with-unpaid-e-challans-freeze-online-services-supreme-court-orders-notes-over-23000-crore-traffic-fines-pending-552686 · 2 अक्टूबर 2026, सुबह 5:30 IST
- Moneycontrol https://www.moneycontrol.com/news/india/blacklist-them-deny-fitness-certificates-sc-on-vehicles-with-pending-challans-14042797.html · 2 अक्टूबर 2026, सुबह 5:30 IST




