यह नोट एनपी नाउ है। नोटिस सत्यापित हैं। अगली तारीख बदल रही है। रिपोर्टें 16 अक्टूबर 2026 को करीब शाम 5:45 बजे IST दोबारा जाँची गईं, पैकेज का तथ्य-समय शाम 5:50 बजे IST है, और पोस्ट शाम 6:12 बजे IST लगा। द हिंदू, इंडिया टुडे और बिज़नेसलाइन, पीटीआई के साथ, नोटिस की रिपोर्टों में हैं।

16 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्ल्य बागची की पीठ ने आपराधिक अवमानना के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए। नोटिस संजय राउत को गए, जो शिव सेना (यूबीटी) के सांसद हैं, और पत्रकार निखिल वागले को। याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की है। मामला मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका के बारे में उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों का है। यह नोट उन टिप्पणियों को दोबारा नहीं छापता। वह दर्ज करता है कि अदालत ने उनके बारे में पूछा है।

बार एसोसिएशन व्यक्तिगत पेशी चाहती थी। पीठ ने छूट दी। कैप्शन पीठ के शब्द इस तरह दर्ज करता है: “We are giving a show-cause notice as of now... granting an exemption from personal appearance.” हिंदी में वह यह कह रहे हैं कि अभी कारण बताओ नोटिस दे रहे हैं, और व्यक्तिगत पेशी से छूट दे रहे हैं।

कारण बताओ नोटिस, कैप्शन की सादी भाषा में, मतलब अदालत उनका स्पष्टीकरण सुनेगी और फिर तय करेगी कि आगे क्या होगा। यह दोष का निष्कर्ष नहीं है। अदालत ने मामला तय नहीं किया। मुहर भी यही कहती है। नोटिस सत्यापित हैं। निष्कर्ष नहीं।

सुनवाई से पहले का क़दम सहमति था। महान्यायवादी आर. वेंकटरमणि ने 15 अक्टूबर को अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 की धारा 15(1)(ख) के तहत बार एसोसिएशन की याचिका के लिए सहमति दी। बार एंड बेंच और उस सहमति की दूसरी रिपोर्टें स्रोत सूची में हैं, याचिका पर लाइव लॉ और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के साथ।

राउत ने बाद में क्या कहा, वह मीडिया बयान है, आदेश नहीं। लोकमत, एएनआई छापते हुए, लिखता है कि 16 अक्टूबर को उन्होंने संवाददाताओं से हिंदी से अनूदित शब्दों में कहा: “If there is such a feeling about me, I regret it and I apologise to them… We and the country want justice.” हिंदी में वह यह कह रहे हैं कि अगर उनके बारे में ऐसा भाव है तो उन्हें खेद है और वे क्षमा चाहते हैं, और वे व देश न्याय चाहते हैं। एबीपी लाइव भी लिखता है कि उन्होंने क्षमा माँगनी चाही। कैप्शन कहता है कि निखिल वागले एक पोस्ट हटा चुके थे और क्षमा दे चुके थे। वह हटाना और वह क्षमा रिपोर्ट हैं। वे अदालत का निष्कर्ष नहीं हैं।

कैप्शन जनहित को बोलने की आज़ादी और अदालत की गरिमा के बीच की रेखा पर रखता है। यही कैप्शन का ढाँचा है। यह फ़ैसला नहीं है कि रेखा कहाँ पड़ती है। पोस्ट लगने तक सुनवाई की अगली तारीख का इंतज़ार था। यह नोट तारीख नहीं देता।

कवर विकिमीडिया कॉमन्स की तस्वीर है, भारत के सुप्रीम कोर्ट की, सुभाशीष पाणिग्रही की, लाइसेंस CC BY-SA 4.0। बाकी कार्ड न्यूट्रल पॉलिटिक्स के ग्राफ़िक हैं। उनका श्रेय “NP graphic” है।

जो सत्यापित है वह पीठ, नोटिस, छूट, और महान्यायवादी की सहमति है। जो कथित है वह टिप्पणियों का स्वरूप है, इसीलिए नोटिस हैं। जो बदल रहा है वह अगली तारीख है। जो तय नहीं हुआ वह दोष है।

मुख्य बातें

  1. एनपी नाउ। मुहर: सत्यापित, अगली सुनवाई की तारीख बदल रही है। दोबारा जाँच 16 अक्टूबर 2026 को करीब शाम 5:45 बजे IST। पैकेज का तथ्य-समय शाम 5:50 बजे IST। पोस्ट शाम 6:12 बजे IST।
  2. पीठ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्ल्य बागची। शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर।
  3. मामला मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका के बारे में उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों का है। पीठ ने व्यक्तिगत पेशी से छूट दी। उसके शब्द, जैसा कैप्शन दर्ज करता है: अभी कारण बताओ नोटिस दे रहे हैं, व्यक्तिगत पेशी से छूट के साथ।
  4. कारण बताओ नोटिस स्पष्टीकरण माँगता है। अदालत ने मामला तय नहीं किया। यह दोष का निष्कर्ष नहीं है।
  5. महान्यायवादी आर. वेंकटरमणि ने 15 अक्टूबर को अवमानना न्यायालय अधिनियम, 1971 की धारा 15(1)(ख) के तहत सहमति दी।
  6. लोकमत, एएनआई के ज़रिए, लिखता है कि राउत ने 16 अक्टूबर को संवाददाताओं से हिंदी से अनूदित शब्दों में कहा कि अगर उनके बारे में ऐसा भाव है तो उन्हें खेद है और वे क्षमा चाहते हैं, और वे व देश न्याय चाहते हैं। कैप्शन कहता है कि वागले पोस्ट हटाकर क्षमा माँग चुके थे।

दोनों तरफ़ क्या कहा

अदालत ने क्या किया

उसने कारण बताओ नोटिस दिए और व्यक्तिगत पेशी से छूट दी। उसने किसी को दोषी नहीं पाया।

जो बदल रहा है

सुनवाई की अगली तारीख। पोस्ट के समय उसका इंतज़ार था। क्षमा रिपोर्ट किए गए बयान हैं, अदालत का आदेश नहीं।

पुष्टि नहीं हुई

  • दोष। कारण बताओ नोटिस स्पष्टीकरण की माँग है।
  • सुनवाई की अगली तारीख। शाम 6:12 बजे IST तक कोई रिपोर्ट नहीं हुई थी।

स्रोत

  1. The Hindu — Show-cause notices to Sanjay Raut and Nikhil Wagle over remarks concerning the Chief Justice and the judiciary https://www.thehindu.com/news/national/supreme-court-issues-notices-to-mp-sanjay-raut-journalist-nikhil-wagle-over-remarks-targeting-cji-judiciary/article71591651.ece
  2. India Today — Criminal contempt notices, and an exemption from personal appearance https://www.indiatoday.in/india/story/sanjay-raut-nikhil-wagle-supreme-court-criminal-contempt-notices-ptag-3018722-2026-10-16
  3. BusinessLine — Contempt notices over remarks on the Chief Justice, with PTI https://www.thehindubusinessline.com/news/supreme-court-issues-contempt-notices-to-sanjay-raut-nikhil-wagle-over-remarks-on-cji/article71592166.ece
  4. India Today — The contempt action and the Chief Justice https://www.indiatoday.in/india/law-news/story/nikhil-wagle-sanjay-raut-contempt-action-cji-surya-kant-remarks-3018470-2026-10-16
  5. LiveLaw — The Supreme Court Bar Association's contempt petition https://www.livelaw.in/top-stories/scba-files-contempt-petition-against-journalist-nikhil-wagle-mp-sanjay-raut-for-comments-against-cji-surya-kant-554925
  6. Bar & Bench — The Attorney General's consent for the Bar Association's case https://www.barandbench.com/news/ag-grants-consent-to-scbas-contempt-of-court-case-against-nikhil-wagle-sanjay-raut-over-remarks-on-cji-kant
  7. The Times of India — The Bar Association's criminal contempt plea https://timesofindia.indiatimes.com/india/sc-bar-association-files-criminal-contempt-plea-against-sanjay-raut-nikhil-wagle/articleshow/134971540.cms
  8. Lokmat — Sanjay Raut's apology, via ANI, after remarks concerning the court https://www.lokmat.com/national/sanjay-raut-apologizes-to-the-supreme-court-following-the-chief-justices-remarks-on-his-criticism-on-court-a-a629/
  9. ABP Live — Sanjay Raut seeks to apologise to the Supreme Court https://www.abplive.com/states/maharashtra/maharashtra-politics-sanjay-raut-seeks-apology-from-the-supreme-court-3202776